ब्लॉग पुरालेख

सात……..

सात एक अंक है,
क्या सिर्फ एक अंक है ???
दो लोग जब पास होते है,RAINBOW
दूर हो के भी साथ (सात) होते है,
जब होता कोई सात (साथ) दिल के,
सपने दिखता सात जन्मों के,
कभी बताता इंद्रधनुष मैं रंग है सात,
कभी दिखता सात अजूबे दुनिया के,
जैसे नहीं मानते सात सुर, सात महाद्वीपों को,DIL
वेसे ही गोते खाता दिल भी सात समुन्दर में,
हफ्ते मैं सात दिन दिल उसे चाहता है,
सात तारों (शप्त ऋषि) मैं भी याद आता है.
सात सुर, सात वादे, सात फेरे
सभी सात कि माया है,
सभी तरफ सात छाया है.
आठों दिशाओ मैं तुम पास हो,
दुनिया जीत लेंगे अगर तुम साथ हो.

Advertisements

कभी तो अपने दिल को खोलो!!!!!!!!!!!!!!!

कभी यादों की छाँव से खेलो

कभी पेड़ों से शीतलता ले लो,
कभी सूरज मैं आंखे डालो
कभी अपनों को गले लगा लो|

.
कभी संभालो पागल दिल को
कभी गगन मैं दूर उड़ा दो,
प्यार हमेशा दिल मैं पालो
रस्ते मैं कभी यूँ ही मुस्करा दो|
.
कभी आँखों से बात करो तुम
कभी सांसों की ताल सुना दो,
प्यार करे जो तुमको दिल से
कभी उसका भी आभार जाता दो|
.
कभी सपनों मैं उन्हें निहारो
कोई खिलौना हाथ मैं लेकर

कभी उन्ही की नींद चुरा लो,
उसे ही दिल की बात बता दो|
.
कभी तो अपने दिल को खोलो
किसी को अपने राज बता दो,
दर्द छिपा है दिल मैं जो भी
आँखों के रस्ते उसे बहा दो|
.
जिंदगी भर जाएगी खुशियों से यूँ ही
कभी दुश्मन को भी गले लगा लो,
प्यार रखो इन आँखों मैं अब तुम
दिल मैं भी भगवान् बसा लो|

सोने की चिड़िया

कोई नहीं पहचानता यहाँ किसी को भी|
इंसानियत के बचे है अब तो सिर्फ अवशेष||

सोने की चिड़िया कहते थे इस देश को|
अब तो लुट कर जा रहा है सारा धन विदेश||

लूटा था देश को तुने तो मैं भी लूटूँगा इसे|
हो रहा है इसी बात का हर जगह चर्चा विशेष||

हर जगह महंगाई की मची है लुट|
क्या रह गए है देश मैं सिर्फ लुटेरे ही शेष?||

चीर देते हैं आतंकवादी देश का सीना यूंही|
फिर भी “बिरयानी” खिला के पता नहीं क्या दे रहे है सन्देश||

वो तो है सीधे साधे, चुप बेठे आंखे मूंद कर|
लुट लो जितना लुट सकते हो यही दे रहे आदेश||

सिंह जी कहते है नहीं है कोई छड़ी जादू की मेरे पास|
लगता है अब तो “HARRY POTTER” चलेगा देश||

कभी मुझसे यूँ ही!!!!!!!!!!!

चाहता हूँ मै तुझे,
धड़कन तू है मेरी,
इस बात की सच्चाई,
कभी तुझे वक्त बताएगा
तू ख़ास है कितनी,
जिंदगी मैं मेरी|
मेरे बिना ये जज़्बात,
तुझे कोंन दिखाएगा||
जा रही है छोड़ के,
जिंदगी अधर मैं है|
नफरतों के तूफानों से इसे,
उस पार कोंन कराएगा||
तू रुसवा जो हो गई,
कभी मुझसे यूँ ही|
चिराग इस जीवन का,
वहीँ बुझ जाएगा||
लिपट जाती है तू कही,
मुझसे इस कदर|
उस सासों के एहसास को,
कोंन मिटाएगा||
खुवाबों की हरकतें,
दिल को करती है बेचैन|
तेरे एक इशारे पे तो,
ये समां भी रो जाएगा||
परे उन रातों के,
नकली खुवाबों से कहीं|
जिंदगी का गुलिस्ता,
इस धरा पे कोंन सजाएगा||
तू आ जा थाम ले मेरा हाथ,
फूल खिल जाएगा,
खुवाब मिल जाएगा|

ABOUT ME (मेरे बारे में)

जिंदगी के बारे में मैं क्या बताऊँ,
दिल चाहे लिखना पर लिख न पाऊं,
सोचता हूँ कुछ तो बता ही जाऊं,
पर इन नासमझ हाथों को केसे समझाऊं,
लिखना तो चाहते है ये भी बहुत कुछ,
पर लिखने के शब्द कहाँ से लाऊं,
दिल तो चाहे लिखना पर लिख न पाऊं.