Category Archives: मेरा देश

सोने की चिड़िया

कोई नहीं पहचानता यहाँ किसी को भी|
इंसानियत के बचे है अब तो सिर्फ अवशेष||

सोने की चिड़िया कहते थे इस देश को|
अब तो लुट कर जा रहा है सारा धन विदेश||

लूटा था देश को तुने तो मैं भी लूटूँगा इसे|
हो रहा है इसी बात का हर जगह चर्चा विशेष||

हर जगह महंगाई की मची है लुट|
क्या रह गए है देश मैं सिर्फ लुटेरे ही शेष?||

चीर देते हैं आतंकवादी देश का सीना यूंही|
फिर भी “बिरयानी” खिला के पता नहीं क्या दे रहे है सन्देश||

वो तो है सीधे साधे, चुप बेठे आंखे मूंद कर|
लुट लो जितना लुट सकते हो यही दे रहे आदेश||

सिंह जी कहते है नहीं है कोई छड़ी जादू की मेरे पास|
लगता है अब तो “HARRY POTTER” चलेगा देश||

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