Category Archives: दिल तड़पता है

क्यूँ कहते हो?????

पास आकर हमे दूर जाने को कहते हो,
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दिल लगाकर भूल जाने को कहते हो,

यादो से दिल लगाने को कहते हो,

बिन बारिस के खीखिलाने को कहते हो,

बिना लो के शमा जलाने को कहते हो,

हम तो नादान है इस लिए आप,

जो भी कहते हो शायद सच ही कहते हो……

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कभी मुझसे यूँ ही!!!!!!!!!!!

चाहता हूँ मै तुझे,
धड़कन तू है मेरी,
इस बात की सच्चाई,
कभी तुझे वक्त बताएगा
तू ख़ास है कितनी,
जिंदगी मैं मेरी|
मेरे बिना ये जज़्बात,
तुझे कोंन दिखाएगा||
जा रही है छोड़ के,
जिंदगी अधर मैं है|
नफरतों के तूफानों से इसे,
उस पार कोंन कराएगा||
तू रुसवा जो हो गई,
कभी मुझसे यूँ ही|
चिराग इस जीवन का,
वहीँ बुझ जाएगा||
लिपट जाती है तू कही,
मुझसे इस कदर|
उस सासों के एहसास को,
कोंन मिटाएगा||
खुवाबों की हरकतें,
दिल को करती है बेचैन|
तेरे एक इशारे पे तो,
ये समां भी रो जाएगा||
परे उन रातों के,
नकली खुवाबों से कहीं|
जिंदगी का गुलिस्ता,
इस धरा पे कोंन सजाएगा||
तू आ जा थाम ले मेरा हाथ,
फूल खिल जाएगा,
खुवाब मिल जाएगा|

भूल न जाऊं!!!

भूल न जाऊं कहीं उसको,
जिसने मेरा साथ दिया|
भूल न जाऊ कहीं उसको,
दिल जिसने आज़ाद किया||
जब भी सोचूं यादों से मैं,
आँखों मैं वो बस्ती जाए|
हरदम सोचूं उसको ही मैं,
साँसों से वो चलती जाए||
जीवन है अब यादें उसकी,
बातें उसकी, सांसें उसकी|
भूल के भी नहीं भूल सकता,
झील से गहरी आँखें उसकी||
केसे भूलूं उसको जिसने,
इतना प्यारा संसार दिया|
भूल न जाऊं कहीं उसको,
जिसने जीवन दान दिया||

प्यार से न प्यार क्यूँ

प्यार से न प्यार क्यूँ, जिंदगी भी है पराई,
दिल में हर तरफ है क्यूँ, इतनी दरिंदगी समाई||
दुश्मनी क्यूँ आज करता, दोस्ती को छोड़ के,
प्यार दो और प्यार लो, बात ये सब ने भुलाई||
दो दिल भी मिलते है आज, धरती के कोने में कही,
कत्ल हो जाता है उनका, गर देते है दिखाई||
उस दिल को गिरा दो, स्वछंद उड़े जो आकाश में,
किसने दिया ये हक़ उनको, सिख किसने ये सिखाई||
प्यार न देखे धर्म न जात, होता है ये साँस से,
क्यूँ इज्ज़त कहते है उसे, किसी की जिंदगी पराई||
जिस दिन समझ लेंगे सब, प्यार के मूल्य को,
कष्ट न होगा कही, न होगी पीर पराई||

जिंदगी है बहती रेत, फिसलती है हाथ से,
जियो तो प्यार से जियो, फिर तो होनी है जुदाई||
जिंदगी भी आज है, जिंदगी मैं समाई,
बस प्यार हो सभी के दिल मैं, इसी मैं सबकी भलाई||

नाम लिखना बाकि था

दिल के कोरे कागज़ पे एक नाम लिखना बाकि था,
उनकी आँखों में बस थोडा सा जाम लिखना बाकि था,
हमने तो समझा था की हमारी कविता ख़त्म हो गयी,
लेकिन अभी तो एक तूफ़ान लिखना बाकि था,
छुप गया था चाँद भी बादलों मैं कही,
पर उसे भी चांदनी को पैगाम लिखना बाकि था,
दिल भी सो गया है आगोश मैं ले के उसे,
एकटक देख रहा हूँ जो मकान बिकना बाकि था,
क्यूँ जा रही है वो मुझे यूँ तड़पता छोड़ के,
अभी तो सांसों मैं उसी का नाम लिखना बाकि था,
सोचता हु तनहाइयों में क्यूँ अकेला आज हूँ,
काश लिख देता ख़त में, सिर्फ उसका नाम लिखना बाकि था