प्यार ही तो अपना है

प्यार एक मीठा सपना है

एक सपना है जो सिर्फ अपना है

सुने रास्तों को ताकना है
अकेले मैं भी सजना है
बस प्यार ही एक अपना है
मिलना है फिर बिछड़ना है
सपनो से फिर दुरी रखना है
मिलके उससे फिर से
फिर सपनो मैं रंग भरना है
बस प्यार ही एक अपना है
जो मीठा सा सपना है
सपनो के तो पंख है होते
दुनिया वाले जब चेन से सोते
मुझे तभी बस जागना है
याद मैं उसकी पूरी रात
करवटें भी तो पलटना है
बस प्यार ही सच्चा सपना है
क्यूँ बस एक सपना ही तो अपना है
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About TARUN

जिंदगी के बारे में मैं क्या बताऊँ, दिल चाहे लिखना पर लिख न पाऊं, सोचता हूँ कुछ तो बता ही जाऊं, पर इन नासमझ हाथों को केसे समझाऊं, लिखना तो चाहते है ये भी बहुत कुछ, पर लिखने के शब्द कहाँ से लाऊं, अब आगे और क्या बताऊँ, दिल तो चाहे लिखना पर लिख न पाऊं.

Posted on अक्टूबर 29, 2012, in दिल की आवाज़ and tagged , , , , , , , , , , , . Bookmark the permalink. टिप्पणी करे.

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