प्यार से न प्यार क्यूँ

प्यार से न प्यार क्यूँ, जिंदगी भी है पराई,
दिल में हर तरफ है क्यूँ, इतनी दरिंदगी समाई||
दुश्मनी क्यूँ आज करता, दोस्ती को छोड़ के,
प्यार दो और प्यार लो, बात ये सब ने भुलाई||
दो दिल भी मिलते है आज, धरती के कोने में कही,
कत्ल हो जाता है उनका, गर देते है दिखाई||
उस दिल को गिरा दो, स्वछंद उड़े जो आकाश में,
किसने दिया ये हक़ उनको, सिख किसने ये सिखाई||
प्यार न देखे धर्म न जात, होता है ये साँस से,
क्यूँ इज्ज़त कहते है उसे, किसी की जिंदगी पराई||
जिस दिन समझ लेंगे सब, प्यार के मूल्य को,
कष्ट न होगा कही, न होगी पीर पराई||

जिंदगी है बहती रेत, फिसलती है हाथ से,
जियो तो प्यार से जियो, फिर तो होनी है जुदाई||
जिंदगी भी आज है, जिंदगी मैं समाई,
बस प्यार हो सभी के दिल मैं, इसी मैं सबकी भलाई||

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About TARUN

जिंदगी के बारे में मैं क्या बताऊँ, दिल चाहे लिखना पर लिख न पाऊं, सोचता हूँ कुछ तो बता ही जाऊं, पर इन नासमझ हाथों को केसे समझाऊं, लिखना तो चाहते है ये भी बहुत कुछ, पर लिखने के शब्द कहाँ से लाऊं, अब आगे और क्या बताऊँ, दिल तो चाहे लिखना पर लिख न पाऊं.

Posted on सितम्बर 27, 2011, in दिल तड़पता है and tagged , , , , , , , . Bookmark the permalink. 4 टिप्पणियाँ.

  1. Hi, Tarun JI
    I FOUND YOUR POETRY VERY FINE AND POINTING TOWARDS HUMANITY. ITs my pleasyre reading it.

  2. ज़िंदगी उसी की है,जो किसी का हो गया,प्यार ही में खो गया…
    सुंदर रचना…

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